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ई-व्याख्यान (e-Lectures)

भूमिका


भारत में सूचना तथा संचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुई तरक्की से जीवन का हर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। देश में इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का दायरा तथा प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, तथा इंटरनेट सेवाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। जाहिर है शिक्षा का क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है।बेहतर शिक्षण, प्रशिक्षण तथा अधिगम के लिए शैक्षिक ई-सामग्री आज बहुत उपयोगी साबित हो रही है तथा आने वाले दिनों में इसकी उपयोगिता तथा उपादेयता बढ़ेगी। दृश्य-श्रव्य माध्यमों तथा ऐनिमेशन तकनीक द्वारा शैक्षिक सामग्री बेहतर तरीके से छात्रों, अध्यापकों, प्रशिक्षकों तथा आम जनमानस तक पहुँचायी जा सकती है।

 

इसी संदर्भ में हिन्दी में शैक्षिक ई-सामग्री के विकास के लिए होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केन्द्र ने पहल की है।संस्था ने 2008, 2010, 2012 तथा 2014 में विज्ञान परिषद प्रयाग के तत्वावधान में त्रिदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशालाएं आयोजित की हैं इनका विषय था "हिन्दी में शैक्षिक ई-सामग्री का विकास"। इन कार्यशालाओं में देश के विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों तथा कॉलेजों से प्रतिष्ठित विज्ञान लेखकों/संचारको को प्रतिभागी विशेषज्ञ के रूप में व्याख्यान हेतु आमंत्रित किया गया था। इनसे आग्रह किया गया था कि वे विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के किसी रुचिकर विषय पर पॉवर प्वाइंट या ओवरहेड प्रोजेक्टर पर दी जाने योग्य ऐसी प्रस्तुति तैयार करके आएँ जो कॉलेज स्तर तक के छात्रों तथा अध्यापकों के लिए उपयोगी हो।

 

प्रत्येक प्रतिभागी से यह भी अपेक्षित था कि वह अपनी प्रस्तुति पर आधारित एक निबंध इस कार्यशाला के संयोजक को सौंपें जिसे तथाचित संपादनोपरान्त पुस्तक रूप में प्रकाशित किया जा सके। उन कार्यशालाओं की प्रस्तुतियां ई-व्याख्यान के रूप में वेबसाइट पर उपलब्ध करायी गयी हैं। इन सभी सामग्रियों का प्रतिलिप्याधिकार (कॉपीराइट) होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केन्द्र, मुंबई के पास सुरक्षित है। कृपया सामग्रियों के बारे में अपने विचारों तथा सुझावों से हमें अवगत कराने का कष्ट करें। आप ई-मेल के जरिए भी kkm@hbcse.tifr.res.in पर अपनी राय व्यक्त कर सकते हैं।